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VII / VI · MMXXVI
— सातवाँ कक्ष —

Litany

— स्तुतिगान —
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स्तुतिगान दोहराव नहीं है। हर शब्द एक ही बार गूँजता है। पर हाथ उस चिन्ह को सहेजता है। इसे पढ़ो, यदि तुम मौन को समझते हो।
001 Litany ILitánia I. 0002 Litania IILitánia II
— Z!, MMXXVI —