— सातवाँ कक्ष —
Litany
— स्तुतिगान —
00 : 00
स्तुतिगान दोहराव नहीं है।
हर शब्द एक ही बार गूँजता है।
पर हाथ उस चिन्ह को सहेजता है।
इसे पढ़ो, यदि तुम मौन को समझते हो।
— Z!, MMXXVI —