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— Manifesto —
— सात सिद्धांत —

Manifesto

— जो Z! मानते हैं, और जो नहीं मानते —
I.

मौन कृति है।

अनुपस्थिति कोई कमी नहीं। खाली स्थान यह नहीं कहता: नहीं है। यह कहता है: प्रतीक्षा में है। Z! के अभ्यास में मौन पृष्ठभूमि नहीं — अग्रभूमि है।

II.

धीरे।

एक संक्रमण छह सौ मिलीसेकंड। एक कविता पंक्ति दर पंक्ति आती है। दर्शक स्वयं भी धीमा होता है। जल्दबाज़ी दूसरी शैली है।

III.

कभी ऑडियो-रिएक्टिव नहीं।

कृतियाँ ध्वनि पर प्रतिक्रिया नहीं करतीं। स्पंदित नहीं होतीं। संगीत के साथ साँस नहीं लेतीं। Z! एक अलग रजिस्टर है — समकालीन गैलरी, जहाँ दर्शक की साँस कक्ष में सबसे तेज़ चीज़ है।

IV.

'वाह' मौन में रहता है।

धूमधाम नहीं, चमत्कार नहीं। एक सेकंड का ठहराव, जब हाथ कॉफी के कप की ओर रुक जाए। मौन विस्मय। यही Z! की मान्यता है।

V.

कृतियाँ पूर्ण नहीं होतीं।

एक प्रतीक्षा में है। दूसरी अभी जन्मी भी नहीं। ABSENCE जानबूझकर खालीपन है — महीने में एक आती है, और बाकी स्थान कमी नहीं, बल्कि प्रतीक्षा हैं।

VI.

दो चरित्र, दो रजिस्टर।

Z! समकालीन संकल्पनात्मक। DJ Zalan! क्लब संस्कृति। एक ही कलाकार, दो अलग भाषाएँ। कभी मिश्रित न करें — दोनों कमज़ोर होंगे।

VII.

हर विषय में गरिमा।

Oracle सप्ताह की विश्व-घटनाओं को आसवित करता है — पर कभी युद्ध, आतंक, विपदा नहीं। कला कठिन विषयों पर बोल सकती है, पर गरिमा से, प्रतिक्रियात्मक नहीं।

यह नियम-पुस्तक नहीं।
यह स्मरण है — स्वयं को, कि भटकूँ नहीं।

— Z!, MMXXVI —